Ram Rahim Baba aur Gabbar Joke in Hindi

गब्बर: कितने आदमी थे
सांभा: 4 सरदार

गब्बर: कौन कौन
सांभा:
राम पाल
राम रहीम
आशा राम
राम बृक्ष

गब्बर: क्या बात है रे कालिया ये चारों मे राम ही राम है
ठाकुर: “राम नाम की लूट है लूट सको तो लूट ,अपनी लुटिया बची रही रहे चाहे किसी को कूट”
गब्बर: जियो रे ठाकुर, अब अगला नंबर किसका?
कालिया: अरे वही जो आँख मारता रहता है
बसंती: सरदार बाबा राम देव
गब्बर: इ तो गज़ब होई गवा ससुरा इसमे भी —राम!!

Ek dum naya GST Song in Hindi

ऐसे ना मुझे तुम देखो..

GST लगा दूंगा..

पैसे भी चुरा लुंगा तुमसे..

Tax भी लगा दूंगा..

गीतकार -: अरुण जेटली
संगीतकार -: मोदी जी

Funny Shopkeeper joke in Hindi

जब दुकानदार कहता है कि आपको ज्यादा नहीं लगाएंगे।

तो एक बात हमेशा याद रखना कि इसमें ‘चूना’ शब्द Silent होता है।

Funny Narendra Modi joke from Twitter

एक व्यक्ति मरने के बाद स्वर्ग जाता है वहाँ अरबो घड़िया एक बड़ी दीवार पर लगी हुई थी|

वो परी से पूछता है: इतनी घड़िया क्यों हैं ?

परी : ये “झूठ घड़ी” हैं
जब भी आप धरती पे झूठ बोलते हो तो ये घड़ी चलती है..

आदमी एक बंद घड़ी की ओर इशारा करता है
और पूछता है : ये किसकी घड़ी है …?

परी: ये राजा हरिशचँद्र की है, इनकी सुई कभी नहीं हिली..!

उत्सुकतावश वो पूछ बैठता है
कि नरेन्द्र मोदी की घड़ी कौन सी है… ?

परी : वो हमारे ऑफिस में है,
हम उसे टेबल फैन की तरह इस्तेमाल करते है।

Joke on GST and Salary – Funny Song

सिलसिला का बहुत सुंदर गाना

मैं और मेरी कमाई,
अक्सर ये बातें करते हैं,
टैक्स न लगता तो कैसा होता?
तुम न यहाँ से कटती,
न तुम वहाँ से कटती,
मैं उस बात पे हैरान होता,
सरकार उस बात पे तिलमिलाती ,
टैक्स न लगता तो ऐसा होता,
टैक्स न लगता तो वैसा होता…
मैं और मेरी कमाई,
“ऑफ़ शोर” ये बातें करते हैं….

ये टैक्स है या मेरी तिज़ोरी खुली हुई है ?
या आईटी की नज़रों से मेरी जेब ढीली हुई है,
ये टैक्स है या सरकारी रेन्सम,
कमाई का धोखा है या मेरे पैसों की खुशबू,
ये इनकम की है सरसराहट
कि टैक्स चुपके से यूँ कटा,
ये देखता हूँ मैं कब से गुमसुम,
जब कि मुझको भी ये खबर है,
तुम कटते हो, ज़रूर कटते हो,
मगर ये लालच है कि कह रहा है,
कि तुम नहीं कटोगे, कभी नहीं कटोगे,……..

मज़बूर ये हालात इधर भी हैं, उधर भी,
टैक्स बचाई ,कमाई इधर भी है, उधर भी,
दिखाने को बहुत कुछ है मगर क्यों दिखाएँ हम,
कब तक यूँही टैक्स कटवाएं और सहें हम,
दिल कहता है आईटी की हर रस्म उठा दें,
क्यों टैक्स में सुलगते रहें, आईटी को बता दें,
हाँ, हम टैक्स पेयर हैं,
टैक्स पेयर हैं,
टैक्स पेयर हैं,
अब यही बात पेपर में इधर भी है, … और उधर भी है