Funny WhatsApp Admin Jokes in Hindi

एडमिन का मतलब
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A— आवारा
D— ढोंगी
M— मतलबी
I—- इगो वाला
N— नकटा …

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नहीं होता है

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A— आदरणीय
D— धर्मात्मा
M— मस्त
I— इमानदार
N— नाइस

होता है… 😀

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सारे व्हॉट्सअप एडमिन को समर्पित..

बिन पगारी फुल अधिकारी

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एक बार अपना admin पानी पी रहा था

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अब क्या admin पानी भी नहीं पी सकता!!
हर बात में joke…!
जान ले लो admin की

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आज सुबह एडमिन के मन मे विचार आया ,
आज कुछ तुफानी करते है…

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साईकिल निकाली और पेट्रोल भराने चले गए….

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इसमें हसनेवाली क्या बात है साथ मैं बोतल लेके गये….

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हद होगई हर बात पे admin की खिल्ली उड़ाते हो

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Admin पर बिजली का तार गिर गया.

Admin तड़प तड़प के मरने ही वाला था कि

अचानक………..

उसे याद आया बिजली तो 2 दिन से बंद है.
वापस उठकर, हँसते हुए बोला,

साला… याद नहीं आता तो मर ही जाता!

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एडमिन (admin) के हाथ में नया फोन देखकर

दोस्त बोला:- “नया फोन कब ख़रीदा?”

एडमिन :- “नया नहीं, गर्लफ्रेंड का है।”

दोस्त :- “गर्लफ्रेंड का फोन क्यों ले आया?”

एडमिन:-
“रोज कहती थी,
मेरा फोन नहीं उठाते!
आज मौका मिला, उठा लाया” 😀

Hamare admin ki baat nirali 😀 😛

Maths ki bhasha mein kaise baat karein?

पप्पू: सर जी लोग हिंदी या इंग्लिश में ही बात करते है। मैथ्स में क्यों नही..?

टीचर:
ज्यादा 3-5 न कर, 9-2-11 हो जा, वरना 5-7 खीच के दूंगा,
6 के 36 नज़र आयेंगे और 32 के 32 बहार आ जायेंगे।

पप्पू: बस सर….. हिंदी और इंग्लिश ही ठीक है। मैथ्स वाकई खोफनाक सब्जेक्ट है।।

Fero ke 7 Rajasthani Vachan

*** सात बचन फेरां का ***

पेहलो बचन दिनूगै जाग आवै
जद उठूँ बेगा ना जगाइयो
उठतां पाण ही एक कप चाा
गुदडा माहि झलाइयो
लुल्गै भुआरी म्हारे सुं कडे कोनि
ना पानी भरण न जाऊं
औह बचन म्हारो मंजूर होवै
तो थारै डावै अंग माहिं आऊं

दुसरो बचन जाँता ही न्यारी होस्यु
न्यारो घर बनास्या
डांगर पशु राखा कोनि डेयरी पर सुं
थेली आळो दूध ल्यासा
थारै बुढ़िये बुढ़लि गी सेवा मे रे सुं
कोनि होवै मैं पेल्हा ही बताऊं
औह बचन म्हारो मंजूर होवै
तो थारै डावै अंग माहिं आऊं

तीसरो बचन धुवै सुं आँख बलै
ले देइयो गैस कनेक्सन
जेन्टल घाल मशीन सुं गाबा धोंस्या
हाथा क होवै ईफेक्सन
इत्ता गाबा घरां ताबै कोनि आवै
धोबी सुं प्रेस कराऊँ
औह बचन म्हारो मंजूर होवै
तो थारै डावै अंग माहिं आऊं

चौथो बचन गाडो सो दिन क्यां
कटै मनोरंजन क़ बिना
घर म्ही रंगीन टीवी होवै अर
घर की होवै डिश एंटीना
अपो आपणी पसंद गा नाटक देखां
काई बात सर्मिंदगी की
मैं देखूँ कहानी घर घर की
थे देखियो कसोटी ज़िंदगी की
कोई बटाऊ आजै तो मैं बीच म्ही
उठगै चाा कोनि बनाऊं
औह बचन म्हारो मंजूर होवै
तो थारै डावै अंग माहिं आऊं

पांचवों बचन बात करण नै मोबाईल होवै
त्तो जद ही मैं पीयर जाऊं
टायला लागेड़ो न्हाणघर होवै
फुआरो चलागे न्हाऊं
घरा ही सामान ल्यादेइयो पण
सातवें दिन ब्यूटीपार्लर जाऊं
औह बचन म्हारो मंजूर होवै
तो थारै डावै अंग माहिं आऊं

छटो बचन थे मेरे अलावा
कीह कानि न झांकियो
कठै एडै मौके जाओ तो मनै
आगलै पासै राखियो
मेरी पसंद सुं टूम छलौ पहरुं
जिता मर्जी सूट सिमाऊं
औह बचन म्हारो मंजूर होवै
तो थारै डावै अंग माहिं आऊं

सातवों अर आखरी बचन है
ध्यान सुं सुण लेइयो
नित आयेड़ी नन्दा चोखी कोनि लागै
फेर ना कइयो या काई बात
जेठुता जेठुति नान्दया नान्दि सागै
मैं ना नेह लगाऊं याद राखिज्यो
औह बचन म्हारो मंजूर होवै
तो थारै डावै अंग माहिं आऊं

Udaas Santa aur Mendak

संता उदास बैठे पानी मे पत्थर मार रहा था..

एक मेढक निकल कर बोला..

“पानी मे आ तेरी उदासी उतारू साले,
अपनी वाली के चक्कर मे मेरी वाली का सिर फोड दिया।”