Surf ke TV Ads aur Mummy

विज्ञापनो की मम्मी कितनी अच्छी होती है.

बच्चे कपड़े गंदे करके आए तो भी हँस के धोती है.

बचपन में जब हम कपडे गंदे कर के आते थे,

तो पहले हम धुलते थे,
बाद में कपड़े!!

Bachpan ke wo din

बचपन में जहां चाहा हंस लेते थे,
जहां चाहा रो लेते थे…

पर अब मुस्कान को तमीज़ चाहिए
और आंसुओ को तन्हाई !

हम भी मुस्कराते थे कभी बेपरवाह अन्दाज़ से…
देखा है आज खुद को कुछ पुरानी तस्वीरों में !

चलो मुस्कुराने की वजह ढूंढते हैं…
जिन्दगी तुम हमें ढूंढो…हम तुम्हे ढूंढते हैं …!!!”‪