Bhai – Behen aur Parivar – WhatsApp Message

—— बड़े होकर भाई-बहन ——
—— कितने दूर हो जाते हैं ——
—— इतने व्यस्त हैं सभी ——
—— कि मिलने से भी मजबूर हो जाते हैं ——

—— एक दिन भी जिनके बिना ——
—— नहीं रह सकते थे हम ——
—— सब ज़िन्दगी में अपनी ——
—— मसरूफ हो जाते हैं ——

—— छोटी-छोटी बात बताये बिना ——
—— हम रह नहीं पाते थे ——
—— अब बड़ी-बड़ी मुश्किलों से ——
—— हम अकेले जूझते जाते हैं ——

—— ऐसा भी नहीं ——
—— कि उनकी एहमियत नहीं है कोई ——
—— पर अपनी तकलीफें ——
—— जाने क्यूँ उनसे छिपा जाते हैं ——

—— रिश्ते नए ——
—— ज़िन्दगी से जुड़ते चले जाते हैं ——
—— और बचपन के ये रिश्ते ——
—— कहीं दूर हो जाते हैं ——

—— खेल-खेल में रूठना-मनाना ——
—— रोज़-रोज़ की बात थी ——
—— अब छोटी सी भी गलतफहमी से ——
—— दिलों को दूर कर जाते हैं ——

—— सब अपनी उलझनों में ——
—— उलझ कर रह जाते हैं ——
—— कैसे बताए उन्हें हम ——
—— वो हमें कितना याद आते हैं ——

—— वो जिन्हें एक पल भी ——
—— हम भूल नहीं पाते हैं ——
—— बड़े होकर वो भाई-बहन ——
—— हमसे दूर हो जाते हैं ——

सिर्फ बीवी बच्चे ही आपका परिवार नहीं है, भाई बहन भी है, जो इनसे पहले से आपके साथ थे – हैं और रहेंगे।

Aadmi vs Aurat – (Patni, Maa aur Beti) – WhatsApp Message

मैं लेटा हुआ था,
मेरी पत्नी मेरा सिर सहला रही थी।
मैं धीरे-धीरे सो गया।
जागा तो वो गले पर विक्स लगा रही थी।
मेरी आंख खुली तो उसने पूछा,
कुछ आराम मिल रहा है?
मैंने हां में सिर हिलाया।
तो उसने पूछा कि खाना खाओगे ?
मुझे भूख लगी थी,

मैंने कहा:- “हां”
“उसने फटाफट रोटी, सब्जी, दाल, चटनी, सलाद मेरे सामने परोस दिए,
और आधा लेटे- लेटे मेरे मुंह में कौर डालती रही ।

मैने चुपचाप खाना खाया, और लेट गया।

पत्नी ने मुझे अपने हाथों से खिलाकर खुद को खुश महसूस किया और रसोई में चली गई।

मैं चुपचाप लेटा रहा।
सोचता रहा कि पुरुष भी कैसे होते हैं?
कुछ दिन पहले मेरी पत्नी बीमार थी,
मैंने कुछ नहीं किया था।

और तो और एक फोन करके उसका हाल भी नहीं पूछा।

उसने पूरे दिन कुछ नहीं खाया था, लेकिन मैंने उसे ब्रेड परोस कर खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा था।

मैंने ये देखने की कोशिश भी नहीं की कि उसे वाकई कितना बुखार था।

मैंने ऐसा कुछ नहीं किया कि उसे लगे कि बीमारी में वो अकेली नहीं।

लेकिन मुझे सिर्फ जरा सी सर्दी हुई थी,
और वो मेरी मां बन गई थी।

मैं सोचता रहा कि क्या सचमुच महिलाओं को भगवान एक अलग दिल देते हैं?

महिलाओं में जो करुणा और ममता होती है वो पुरुषों में नहीं होती क्या?

सोचता रहा,
जिस दिन मेरी पत्नी को बुखार था,

उस दोपहर जब उसे भूख लगी होगी और वो बिस्तर से उठ न पाई होगी,

तो उसने भी चाहा होगा कि काश उसका पति उसके पास होता?
मैं चाहे जो सोचूं,

लेकिन मुझे लगता है कि हर पुरुष को एक जनम में औरत बनकर ये समझने की कोशिश करनी ही चाहिए,

कि सचमुच कितना मुश्किल होता है, औरत को औरत होना, मां होना, बहन होना, पत्नी होना..!!

Bachche aur Maa Baap – WhatsApp Message

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फेसबुक पर एक फोटो पोस्ट हुई
पति पत्नी और बेटा बेटी
लिखा “मे और मेरी प्यारी सी फैमेली”

बेटे ने पापा के हाथ से मोबाइल लिया फोटो देखा
और पूछा पापा दादा दादी कँहा है?
पापा बोला बेटा ये अपनी फैमेली है..
दादा दादी कहाँ से आएंगे

बेटा मतलब जब मेरी भी शादी हो
जायेगी तो आप मेरी फैमेली मेंबर नहीं रहोगे
पिता को साप सूंघ गया

बेटा बोला पापा फिर तो में शादी ही नहीं करूँगा
मुझे आप और मम्मी चाहिए फेमिली में
पिता को अपनी गलती का अहसास हुआ आँखों में आँसू थे

बच्चे वहीँ सीखते हे जो हम सिखाते है…

Pariwar aur Mitra – WhatsApp Message

आज एक नई सीख़ मिली
जब अँगूर खरीदने बाजार गया ।

पूछा “क्या भाव है?
बोला : “80 रूपये किलो ।”

पास ही कुछ अलग-अलग टूटे हुए अंगूरों के दाने पडे थे ।
मैंने पूछा: “क्या भाव है” इनका ?”
वो बोला : “30 रूपये किलो”

मैंने पूछा : “इतना कम दाम क्यों..?
वो बोला : “साहब, हैं तो ये भी बहुत बढीया..!!
लेकिन … अपने गुच्छे से टूट गए हैं ।”

मैं समझ गया कि संगठन, समाज और
परिवार से अलग होने पर हमारी कीमत
आधे से भी कम रह जाती है।

कृपया अपने परिवार एवम् मित्रोसे हमेशा जुड़े रहे।

Ghar, Kaam, Patni aur Zindagi – WhatsApp Message

कल मैं दुकान से जल्दी घर चला आया। आम तौर पर रात में 10 बजे के बाद आता हूं, कल 8 बजे ही चला आया।

सोचा था घर जाकर थोड़ी देर पत्नी से बातें करूंगा, फिर कहूंगा कि कहीं बाहर खाना खाने चलते हैं। बहुत साल पहले, , हम ऐसा करते थे।

घर आया तो पत्नी टीवी देख रही थी। मुझे लगा कि जब तक वो ये वाला सीरियल देख रही है, मैं कम्यूटर पर कुछ मेल चेक कर लूं। मैं मेल चेक करने लगा, कुछ देर बाद पत्नी चाय लेकर आई, तो मैं चाय पीता हुआ दुकान के काम करने लगा।

अब मन में था कि पत्नी के साथ बैठ कर बातें करूंगा, फिर खाना खाने बाहर जाऊंगा, पर कब 8 से 11 बज गए, पता ही नहीं चला।

पत्नी ने वहीं टेबल पर खाना लगा दिया, मैं चुपचाप खाना खाने लगा। खाना खाते हुए मैंने कहा कि खा कर हम लोग नीचे टहलने चलेंगे, गप करेंगे। पत्नी खुश हो गई।

हम खाना खाते रहे, इस बीच मेरी पसंद का सीरियल आने लगा और मैं खाते-खाते सीरियल में डूब गया। सीरियल देखते हुए सोफा पर ही मैं सो गया था।

जब नींद खुली तब आधी रात हो चुकी थी।
बहुत अफसोस हुआ। मन में सोच कर घर आया था कि जल्दी आने का फायदा उठाते हुए आज कुछ समय पत्नी के साथ बिताऊंगा। पर यहां तो शाम क्या आधी रात भी निकल गई।

ऐसा ही होता है, ज़िंदगी में। हम सोचते कुछ हैं, होता कुछ है। हम सोचते हैं कि एक दिन हम जी लेंगे, पर हम कभी नहीं जीते। हम सोचते हैं कि एक दिन ये कर लेंगे, पर नहीं कर पाते।

आधी रात को सोफे से उठा, हाथ मुंह धो कर बिस्तर पर आया तो पत्नी सारा दिन के काम से थकी हुई सो गई थी। मैं चुपचाप बेडरूम में कुर्सी पर बैठ कर कुछ सोच रहा था।

पच्चीस साल पहले इस लड़की से मैं पहली बार मिला था। पीले रंग के शूट में मुझे मिली थी। फिर मैने इससे शादी की थी। मैंने वादा किया था कि सुख में, दुख में ज़िंदगी के हर मोड़ पर मैं तुम्हारे साथ रहूंगा।

पर ये कैसा साथ? मैं सुबह जागता हूं अपने काम में व्यस्त हो जाता हूं। वो सुबह जागती है मेरे लिए चाय बनाती है। चाय पीकर मैं कम्यूटर पर संसार से जुड़ जाता हूं, वो नाश्ते की तैयारी करती है। फिर हम दोनों दुकान के काम में लग जाते हैं, मैं दुकान के लिए तैयार होता हूं, वो साथ में मेरे लंच का इंतज़ाम करती है। फिर हम दोनों भविष्य के काम में लग जाते हैं।

मैं एकबार दुकान चला गया, तो इसी बात में अपनी शान समझता हूं कि मेरे बिना मेरा दुकान का काम नहीं चलता, वो अपना काम करके डिनर की तैयारी करती है।

देर रात मैं घर आता हूं और खाना खाते हुए ही निढाल हो जाता हूं। एक पूरा दिन खर्च हो जाता है, जीने की तैयारी में।

वो पंजाबी शूट वाली लड़की मुझ से कभी शिकायत नहीं करती। क्यों नहीं करती मैं नहीं जानता। पर मुझे खुद से शिकायत है। आदमी जिससे सबसे ज्यादा प्यार करता है, सबसे कम उसी की परवाह करता है। क्यों?

कई दफा लगता है कि हम खुद के लिए अब काम नहीं करते। हम किसी अज्ञात भय से लड़ने के लिए काम करते हैं। हम जीने के पीछे ज़िंदगी बर्बाद करते हैं।

कल से मैं सोच रहा हूं, वो कौन सा दिन होगा जब हम जीना शुरू करेंगे। क्या हम गाड़ी, टीवी, फोन, कम्यूटर, कपड़े खरीदने के लिए जी रहे हैं?

मैं तो सोच ही रहा हूं, आप भी सोचिए

कि ज़िंदगी बहुत छोटी होती है। उसे यूं जाया मत कीजिए। अपने प्यार को पहचानिए। उसके साथ समय बिताइए। जो अपने माँ बाप भाई बहन सागे संबंधी सब को छोड़ आप से रिश्ता जोड़ आपके सुख-दुख में शामिल होने का वादा किया उसके सुख-दुख को पूछिए तो सही।

एक दिन अफसोस करने से बेहतर है, सच को आज ही समझ लेना कि ज़िंदगी मुट्ठी में रेत की तरह होती है। कब मुट्ठी से वो निकल जाएगी, पता भी नहीं चलेगा।