Achche Log – WhatsApp Message

अगर गिलास दूध से भरा हुआ है तो,
आप उसमे और दूध नहीं डाल सकते.

लेकिन आप उसमें शक्कर डाले तो,
शक्कर अपनी जगह बना लेती है …
और अपना होने का अहसास दिलाती है.

उसी प्रकार,
अच्छे लोग हर किसी के दिल में,
अपनी जगह बना लेते हैं …..

Bhai – Behen aur Parivar – WhatsApp Message

—— बड़े होकर भाई-बहन ——
—— कितने दूर हो जाते हैं ——
—— इतने व्यस्त हैं सभी ——
—— कि मिलने से भी मजबूर हो जाते हैं ——

—— एक दिन भी जिनके बिना ——
—— नहीं रह सकते थे हम ——
—— सब ज़िन्दगी में अपनी ——
—— मसरूफ हो जाते हैं ——

—— छोटी-छोटी बात बताये बिना ——
—— हम रह नहीं पाते थे ——
—— अब बड़ी-बड़ी मुश्किलों से ——
—— हम अकेले जूझते जाते हैं ——

—— ऐसा भी नहीं ——
—— कि उनकी एहमियत नहीं है कोई ——
—— पर अपनी तकलीफें ——
—— जाने क्यूँ उनसे छिपा जाते हैं ——

—— रिश्ते नए ——
—— ज़िन्दगी से जुड़ते चले जाते हैं ——
—— और बचपन के ये रिश्ते ——
—— कहीं दूर हो जाते हैं ——

—— खेल-खेल में रूठना-मनाना ——
—— रोज़-रोज़ की बात थी ——
—— अब छोटी सी भी गलतफहमी से ——
—— दिलों को दूर कर जाते हैं ——

—— सब अपनी उलझनों में ——
—— उलझ कर रह जाते हैं ——
—— कैसे बताए उन्हें हम ——
—— वो हमें कितना याद आते हैं ——

—— वो जिन्हें एक पल भी ——
—— हम भूल नहीं पाते हैं ——
—— बड़े होकर वो भाई-बहन ——
—— हमसे दूर हो जाते हैं ——

सिर्फ बीवी बच्चे ही आपका परिवार नहीं है, भाई बहन भी है, जो इनसे पहले से आपके साथ थे – हैं और रहेंगे।

Bhartiya Naari – WhatsApp Message

मैं एक नारी हुँ प्रेम चाहती हूँ और कुछ नही…..

मैं एक नारी हूँ,मैं सब संभाल लेती हूँ
हर मुश्किल से खुद को उबार लेती हूँ

नहीं मिलता वक्त घर गृहस्थी में
फिर भी अपने लिए वक्त निकाल लेती हूँ

टूटी होती हूँ अन्दर से कई बार मैं
पर सबकी खुशी के लिए मुस्कुरा लेती हूँ

गलत ना होके भी ठहराई जाती हूँ गलत
घर की शांति के लिए मैं चुप्पी साध लेती हूँ

सच्चाई के लिए लड़ती हूँ सदा मैं
अपनों को जिताने के लिए हार मान लेती हूँ

व्यस्त हैं सब प्यार का इजहार नहीं करते
पर मैं फिर भी सबके दिल की बात जान लेती हूँ

कहीं नजर ना लग जाये मेरी अपनी ही
इसलिए पति बच्चों की नजर उतार लेती हूँ

उठती नहीं जिम्मेदारियाँ मुझसे कभी कभी
पर फिर भी बिन उफ किये सब संभाल लेती हूँ

बहुत थक जाती हूँ कभी कभी
पति के कंधें पर सर रख थकन उतार लेती हूँ

नहीं सहा जाता जब दर्द,औंर खुशियाँ
तब अपनी भावनाओं को कागज पर उतार लेती हूँ

कभी कभी खाली लगता हैं भीतर कुछ
तब घर के हर कोने में खुद को तलाश लेती हूँ

खुश हूँ मैं कि मैं किसी को कुछ दे सकती हूँ
जीवनसाथी के संग संग चल सपने संवार लेती हूँ

हाँ मैं एक नारी हूँ,मैं सब संभाल लेती हूँ
अपनों की खुशियों के लिए अपना सबकुछ वार देती हूँ।

Born before 1990 – WhatsApp Message

1990 से पहले जन्म वाले जरुर पढ़े
बहुत अच्छी फीलिंग आयेगी ☺
.
हम लोग,
जो 1947 से 1990
के बीच जन्में है,
We are blessed because,

हमें कभी भी

हमारें माता- पिता को
हमारी पढाई को लेकर
कभी अपने programs
आगे पीछे नही करने पड़ते थे…!

स्कूल के बाद हम
देर सूरज डूबने तक खेलते थे

हम अपने
real दोस्तों के साथ खेलते थे;
net फ्रेंड्स के साथ नही ।

जब भी हम प्यासे होते थे
तो नल से पानी पीना
safe होता था और
हमने कभी mineral water bottle को नही ढूँढा ।

हम कभी भी चार लोग
गन्ने का जूस उसी गिलास से ही
पी करके भी बीमार नही पड़े ।

हम एक प्लेट मिठाई
और चावल रोज़ खाकर भी
बीमार नही हुए ।

नंगे पैर घूमने के बाद भी
हमारे पैरों को कुछ नही होता था ।

हमें healthy रहने
के लिए Supplements नही
लेने पड़ते थे ।

हम कभी कभी अपने खिलोने
खुद बना कर भी खेलते थे ।

हम ज्यादातर अपने parents के साथ या grand- parents के पास ही रहे ।

हम अक्सर 4/6 भाई बहन
एक जैसे कपड़े पहनना
शान समझते थे…..
common. वाली नही
एकतावाली feelings …
enjoy करते थे

हमारे पास
न तो Mobile, DVD’s,
PlayStation, Xboxes,
PC, Internet, chatting,
क्योंकि
हमारे पास real दोस्त थे ।

हम दोस्तों के घर
बिना बताये जाकर
मजे करते थे और
उनके साथ खाने के
मजे लेते थे।
कभी उन्हें कॉल करके
appointment नही लेना पड़ा ।

हम एक अदभुत और
सबसे समझदार पीढ़ी है क्योंकि
हम अंतिम पीढ़ी हैं जो की
अपने parents की सुनते हैं…
और
साथ ही पहली पीढ़ी
जो की
अपने बच्चों की सुनते हैं ।

Rakshabandhan – WhatsApp Message

बहन से कलाई पर राखी तो बँधवा ली,
500 रू देकर रक्षा का वचन भी दे डाला!

राखी गुजरी, और धागा भी टूट गया,
इसी के साथ बहन का मतलब भी पीछे छूट गया!

फिर वही चौराहों पर महफिल सजने लगी,
लड़की दिखते ही सीटी फिर बजने लगी!

रक्षा बंधन पर आपकी बहन को दिया हुआ वचन,
आज सीटियों की आवाज में तब्दील हो गया !

रक्षाबंधन का ये पावन त्यौहार,
भरे बाजार में आज जलील हो गया !!

पर जवानी के इस आलम में,
एक बात तुझे ना याद रही!

वो भी तो किसी की बहन होगी
जिस पर छीटाकशी तूने करी !!

बहन तेरी भी है, चौराहे पर भी जाती है,
सीटी की आवाज उसके कानों में भी आती है!

क्या वो सीटी तुझसे सहन होगी,
जिसकी मंजिल तेरी अपनी ही बहन होगी?

अगर जवाब तेरा हाँ है, तो सुन,
चौराहे पर तुझे बुलावा है!

फिर कैसी राखी, कैसा प्यार
सब कुछ बस एक छलावा है!!

बन्द करो ये नाटक राखी का,
जब सोच ही तुम्हारी खोटी है!

हर लड़की को इज़्ज़त दो ,
यही रक्षाबंधन की कसौटी है!